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Wednesday, August 10, 2022

right to information act 2005 captre-14

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১) দ্বিতীয় আপিল কৰ্তৃপক্ষই কিমান দিনৰ ভিতৰত ৰাইয়দান কৰিব লাগিব তাৰ নিৰ্দিষ্ট সময় আছে নেকি?

উত্তৰ :- আইনত তেনে ধৰাবন্ধা নিয়ম দিয়া নাই। তথ্য আয়ুক্তৰ কাৰ্যালয়ত দিনক দিনে দ্বিতীয় আপিলৰ সংখ্যা বাঢ়ি অহাত আৰু সেই মতে চৰকাৰে আন্তগাথনি উন্নয়ন নকৰাত আজিকালি তথ্য আয়ুক্তৰ কাৰ্যালয়ত দ্বিতীয় আপিল নিষ্পত্তিৰ ক্ষেত্ৰত অযথা বিলম্ব হোৱা দেখা যায়।
২) ৰাজ্যিক তথা আয়োগ বা কেন্দ্ৰীয় তথ্য আয়োগৰ বিৰুদ্ধে তথ্য আদালতত গোচৰ তৰিব পাৰি নে?
উত্তৰ:– আইনমতে তথ্য আয়োগৰ সিদ্ধান্তই চূড়ান্ত সিদ্ধান্ত। কিন্তু হাইকোৰ্টত ৰীট কৰিব পাৰি।
৩) দ্বিতীয় আপিলৰ বাবে কোনো মাছুল দিব লাগে নেকি?
উত্তৰ:- দ্বিতীয় আপিলৰ শুনানিত আবেদনকাৰী আৰু লোক তথ্য বিষয়া এই দুয়োপক্ষকে মতা হয়। কিন্তু আবেদন কাৰী উপস্থিত থাকিব লাগিব বুলি তেনে ধৰাবন্ধা নিয়ম নাই। আবেদনকাৰী উপস্থিত নাথাকিবও পাৰে।
৩) আৰ টি আই আবেদননৰ পৰা পোৱা তথ্য গোপনে ৰাখিব লাগে নেকি?
উত্তৰ:- আবেদন কৰি পোৱা তথ্য যিকোনো নাগৰিকে চাব পাৰে। কাকতযোগে প্ৰচাৰ কৰিলেও জগৰ নহয়।
৪) বিধানমতে সময়সীমাৰ ভিতৰত তথ্য প্ৰদান নকৰিলে লোক তথ্য বিষয়াই জৰিমণা ভৰিব লাগিব বুলি কিবা কথা আছে নেকি? নে কিবা ব্যতিক্ৰম আছে?
উত্তৰ:- সাধাৰণতে লোক তথ্যই বিষয়াই আবেদনকাৰীক সময়সীমাৰ ভিতৰত তথ্য দিব নোৱাৰিলে এৰাই চলিব পাৰে যদিহে তেওঁ প্ৰত্যাখান বা বিলম্বৰ আৰত এক যুক্তিসংগত কাৰণ (reasonable cause) থকা বুলি প্ৰমাণ কৰিব পাৰে। ‘যুক্তিসংগত কাৰণ’ৰ ভিতৰত আইনৰ ব বিষয়ে নিজৰ অজ্ঞাতা, ভুল বুজা, অন্য কামত ব্যস্ততা আৰু আৰ টি আই বিষয়ত কম গুৰুত্ব দিয়া কথা বোৰ সামৰি লোৱা নহয়। অৱশ্যে ( reasonable cause)ৰ ব্যাখ্যা আইনত দিয়া নাই। আনহাতে ‘যুক্তিসংগত কাৰণ’ বুলি প্ৰমাণ কৰা দায়িত্ব PIO জনৰ।
English translation :- 

1) Does the second appellate authority have a specific time frame for filing the order?
 Answer: – There is no such provision in the law. The number of second appeals in the office of the Information Commissioner is increasing day by day and accordingly the government is not developing the infrastructure.
 2) Is it possible to file a complaint in the Information Court against the State and Commission or Central Information Commission?
Answer: The decision of the Information Commission is final in law. But it can be re-filed in the High Court.
3) Do I have to pay any fee for the second appeal?
Answer: At the hearing of the Second Appeal, both the petitioner and the matter of public information are agreed upon by both the parties. However, there is no stipulation that the applicant must be present. The applicant may not be present.

3) Should information obtained from RTI application be kept confidential?
Answer: – The information obtained by applying can be viewed by any citizen. This is not the case.
4) Is there any provision in the law for non-disclosure of information within the time limit? Are there any exceptions?
Ans: – In general, if the applicant fails to provide information on the subject matter within the time limit, he may be evaded if he can prove that there is a reasonable cause for rejection or delay. Rational reasons do not include ignorance of the law, misunderstandings, preoccupation with other matters and underestimation of RTI. The law does not give a definite explanation. On the other hand, it is the responsibility of the PIO to prove that it is a ‘reasonable cause’.
Hindi translation :-
1) क्या द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी के पास आदेश भरने के लिए कोई विशिष्ट समय सीमा है?
उत्तर :- कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। सूचना आयुक्त के कार्यालय में द्वितीय अपीलों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है और उसी के अनुरूप सरकार अधोसंरचना का विकास नहीं कर रही है।
2) क्या राज्य और आयोग या केंद्रीय सूचना आयोग के खिलाफ सूचना न्यायालय में शिकायत दर्ज करना संभव है?
उत्तर: सूचना आयोग का निर्णय कानून की दृष्टि से अंतिम होता है। लेकिन इसे उच्च न्यायालय में फिर से दायर किया जा सकता है।

3) क्या मुझे दूसरी अपील के लिए कोई शुल्क देना होगा?
उत्तर: द्वितीय अपील की सुनवाई में, याचिकाकर्ता और सार्वजनिक सूचना के मामले पर दोनों पक्षों द्वारा सहमति व्यक्त की जाती है। हालांकि, इसमें कोई शर्त नहीं है कि आवेदक को उपस्थित होना चाहिए। आवेदक उपस्थित नहीं हो सकता है।
3) क्या आरटीआई आवेदन से प्राप्त जानकारी को गोपनीय रखा जाना चाहिए?
उत्तर :- आवेदन करने से प्राप्त जानकारी को कोई भी नागरिक देख सकता है। यह वह मामला नहीं है।
4) क्या समय सीमा के भीतर सूचना का खुलासा न करने के लिए कानून में कोई प्रावधान है? क्या कोई अपवाद हैं?
उत्तर: – सामान्य तौर पर, यदि आवेदक समय सीमा के भीतर विषय पर जानकारी प्रदान करने में विफल रहता है, तो उसे टाला जा सकता है यदि वह साबित कर सकता है कि अस्वीकृति या देरी का एक उचित कारण है। तर्कसंगत कारणों में कानून की अज्ञानता, गलतफहमी, अन्य मामलों में व्यस्तता और आरटीआई को कम करके आंका जाना शामिल नहीं है। कानून एक निश्चित स्पष्टीकरण नहीं देता है। दूसरी ओर, यह साबित करना पीआईओ की जिम्मेदारी है कि यह एक ‘उचित कारण’ है।
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